काठमांडू और अन्य शहरों में 8–9 सितम्बर को हुए प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें गोलियां चलीं और कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, कई घायल हुए। भारी जनाक्रोश, मंत्रियों के लगातार इस्तीफ़े और सेना के दबाव ने ओली की चौथी कार्यकाल की प्रधानमंत्री पद की यात्रा अचानक समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि यह कदम “देश में शांति और संवाद का रास्ता खोलने” के लिए है।
अब नेपाल में अंतरिम सरकार की संभावना, स्वतंत्र जांच की मांग और सोशल मीडिया बैन पर पुनर्विचार की चर्चा तेज़ है, जबकि पीड़ित परिवारों के लिए मुआवज़े पर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है।
घटनाक्रम का टाइमलाइन
1. पृष्ठभूमि (पिछले कुछ महीनों की स्थिति)
- नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों ने युवाओं, खासकर ‘Gen Z’ वर्ग में गहरा असंतोष पैदा किया।
- सरकार के खिलाफ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोर्चों पर विरोध तेज़ हुआ।
2. प्रदर्शन का उभार (सितंबर 2025 की शुरुआत)
- काठमांडू और अन्य बड़े शहरों में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे।
- मांगें: सोशल मीडिया बैन हटाना, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, और पारदर्शी शासन।
3. हिंसा में बदलता आंदोलन (8–9 सितम्बर 2025)
- प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं।
- पुलिस और सेना ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, गोलियां चलाई गईं, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत और कई घायल हुए।
4. राजनीतिक दबाव और इस्तीफ़ा (9 सितम्बर 2025)
- मंत्रियों के लगातार इस्तीफ़े और सेना के दबाव ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की स्थिति कमजोर कर दी।
- भारी जनाक्रोश और हिंसा के बीच, ओली ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया।
- उन्होंने कहा कि यह कदम “देश में शांति और संवाद का रास्ता खोलने” के लिए है।
0 टिप्पणियाँ