14 जुलाई 2025 को श्रावण मास की पहली सोमवारी पर देशभर में शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों में गूंजते 'बोल बम' के नारों और भक्तों के जलाभिषेक ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया। यह पर्व न केवल एक धार्मिक अवसर है, बल्कि सांस्कृतिक समरसता और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण भी है।
- सावन मास शिव की आराधना का विशेष समय होता है, जहां प्रत्येक सोमवार को व्रत रखकर शिव पूजन किया जाता है।
- शिव पुराण अनुसार सोमवारी व्रत से जीवन में सुख-शांति और इच्छाओं की पूर्ति होती है।
- काशी विश्वनाथ (वाराणसी): हजारों श्रद्धालु गंगाजल और दूध से शिव का अभिषेक करने पहुंचे।
- महाकालेश्वर (उज्जैन): भस्म आरती के साथ दिन की शुरुआत, विशेष दर्शन व्यवस्था।
- बाबा बैद्यनाथ (देवघर): झारखंड में ‘बोल बम’ के नारों की गूंज।
- दक्षेश्वर महादेव (हरिद्वार): शिव के ससुराल में उत्सव जैसा माहौल।
🌟 पूजा विधि और शुभ संयोग
- इस सोमवारी को धनिष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग का शुभ योग बना।
- गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र और पुष्पों के साथ शिव आराधना की गई।
- भक्तों ने शिव चालीसा, रुद्राष्टकम व शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया।
🛡️ व्यवस्थाएं और समावेशिता
- मंदिरों में ड्रोन और CCTV के ज़रिए सुरक्षा व्यवस्था।
- दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं और समर्पित प्रवेश द्वार।
श्रावण सोमवारी केवल व्रत और पूजन का दिन नहीं है, यह भारतीय संस्कृति की श्रद्धा, समर्पण और एकता का प्रतीक है। हर शिवभक्त के लिए यह दिन आत्मशुद्धि और आस्था की नयी ऊर्जा लेकर आता है।
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