नई दिल्ली: वक़्फ़ एक्ट को लेकर देशभर में चल रही क़ानूनी जंग अब एक नए मोड़ पर आ गई है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही 140 से ज़्यादा वक़्फ़ याचिकाओं पर कोई अंतरिम राहत न मिलने और सभी मामलों को हाईकोर्ट्स में भेजने के फ़ैसले पर एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने नाराज़गी ज़ाहिर की है। विष्णु शंकर जैन ने कहा जब मंदिरों के मामलों को सुप्रीम कोर्ट में 13-13 साल तक लटकाया गया, तब कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई। अब वक़्फ़ एक्ट पर 140 से ज़्यादा याचिकाओं को बिना अंतरिम राहत दिए हाईकोर्ट भेज दिया गया। यह सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने SC को सुझाव दिया कि सभी वक़्फ़ एक्ट से जुड़े केसों को एक ही हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और संविधान पीठ के ज़रिए 6 महीने के अंदर इस पर फ़ैसला सुनाया जाए। ताकि देशभर में एक समान क़ानूनी स्थिति बन सके आपको बताते चलें कि वक़्फ़ उसे वक्त में आया जब देशभर में वक़्फ़ एक्ट 1995 को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हिंदू संगठनों और कई याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस एक्ट के ज़रिए वक़्फ़ बोर्ड को ज़रूरत से ज़्यादा अधिकार दिए गए हैं, जिसकी वजह से मंदिर, सार्वजनिक संपत्ति और अन्य ज़मीनों पर दावा किया जा रहा है। इसको लेकर अलग-अलग राज्यों में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहे हैं। हालांकि इस मुद्दे पर आम जनता भी बँटी हुई है। कोई इसे न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ़्तार बता रहा है तो कोई इससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और धार्मिक भावनाओं को लेकर चिंतित है।
दिल्ली के रहने वाले आशीष शर्मा कहते हैं — हमारे मंदिरों के मामले सालों तक फंसे रहते हैं। अगर वक़्फ़ एक्ट पर इतना गंभीर मुद्दा है तो सुप्रीम कोर्ट को भी एक जैसी गंभीरता दिखानी चाहिए। अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट विष्णु शंकर जैन के इस सुझाव पर क्या रुख़ अपनाता है और वक़्फ़ एक्ट पर देशभर में चल रहे मुकदमों का भविष्य क्या तय होता है। देश की जनता भी इस मुद्दे पर अपनी आँखें गड़ाए हुए है, क्योंकि ये न सिर्फ़ क़ानून का सवाल है, बल्कि आस्था और हक़ का भी मामला है।
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