अमेरिका में पढ़ाई करने का सपना हर साल हज़ारों भारतीय स्टूडेंट्स देखते हैं। लेकिन हाल ही में अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स एसोसिएशन (AILA) की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भारतीय छात्रों को लेकर हैरान करने वाला खुलासा किया है।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान जिन स्टूडेंट वीज़ा को रद्द किया गया, उनमें 50% भारतीय छात्र थे। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला इसलिए भी है क्योंकि कुल 327 मामलों में भारत का नाम सबसे ऊपर रहा। इसके बाद चीन का नंबर आया, जहां करीब 14% छात्रों का वीज़ा रद्द किया गया था।
OPT पर रहने वाले छात्रों को सबसे ज़्यादा नुकसान
इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जिन छात्रों के वीज़ा कैंसल किए गए, उनमें से आधे से ज़्यादा वो छात्र थे जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके थे और अमेरिका में OPT (Optional Practical Training) के ज़रिए काम कर रहे थे। OPT अमेरिका में पढ़ाई के बाद छात्रों को मिलने वाली वैध नौकरी की सुविधा है, जिसके ज़रिए वो अपना करियर आगे बढ़ा सकते हैं।
लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि बिना ठोस कारण दिए कई छात्रों के वीज़ा और SEVIS रिकॉर्ड कैंसल कर दिए गए।
क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क?
ट्रंप सरकार की तरफ़ से कहा गया था कि वीज़ा कैंसल करने के पीछे कोई-न-कोई वजह जरूर होती है। प्रशासन का मानना था कि इनमें से कुछ छात्र राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
मगर AILA की रिपोर्ट ने इस दावे की हवा निकाल दी। रिपोर्ट के मुताबिक, 327 मामलों में सिर्फ दो छात्रों का राजनीतिक विरोध का कोई रिकॉर्ड था। यानी बाक़ी छात्रों पर इस तरह का कोई आरोप नहीं था।
छोटे-मोटे मामलों पर भी वीज़ा कैंसल
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन छात्रों के वीज़ा रद्द किए गए, उनमें से 86% छात्रों का किसी न किसी वजह से पुलिस से संपर्क हुआ था। लेकिन हैरानी की बात ये है कि 33% मामलों को बाद में खारिज कर दिया गया।
इनमें से भी कुछ छात्र तेज गाड़ी चलाना या पार्किंग नियम तोड़ना जैसे मामूली मामलों में फंसे थे। वहीं, दो छात्र ऐसे भी थे जो घरेलू हिंसा के शिकार थे और पुलिस से मदद मांगने गए थे। सोचिए, ऐसे मामूली या पीड़ित हालात में भी छात्रों के वीज़ा पर सवाल खड़े कर दिए गए।
AILA ने उठाए सवाल और रखी मांग
इमिग्रेशन लॉयर्स की इस संस्था ने साफ़ कहा है कि बिना ठोस वजह के वीज़ा रद्द करना और SEVIS रिकॉर्ड खत्म करना बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी ज़रूरी है ताकि छात्रों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो।
AILA ने ये भी कहा कि छात्रों को SEVIS कैंसिलेशन के खिलाफ अपील करने का एक आसान और साफ़-सुथरा तरीका मिलना चाहिए, ताकि वो बिना नौकरी गंवाए या यूनिवर्सिटी पर दबाव डाले अपनी बात रख सकें।
2025 में भी जारी है ये सिलसिला
AILA की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जनवरी 2025 से अब तक ICE (Immigration and Customs Enforcement) ने 4,736 SEVIS रिकॉर्ड खत्म कर दिए हैं। इनमें से ज़्यादातर छात्र F1 वीज़ा स्टेटस पर थे।
और तो और — केवल 14% छात्रों को ही कोई नोटिस भेजा गया था। इनमें भी ज़्यादातर छात्र OPT पर थे, जिन्हें बस एक चिट्ठी थमा दी गई कि उनका OPT अब रद्द कर दिया गया है।
बाकी छात्रों को न तो कॉलेज से कोई सूचना मिली और न ही ICE की ओर से। करीब 7% छात्रों ने तो कहा कि उन्हें किसी भी तरफ़ से कोई जानकारी नहीं मिली।
नतीजा — डर और अनिश्चितता का माहौल
ये पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद समझ आता है कि अमेरिका में पढ़ने और काम करने आए भारतीय छात्रों के लिए हालात कितने मुश्किल और अनिश्चित हो चुके हैं। एक छोटी सी गलती, या कई बार बिना गलती के भी, उनका वीज़ा रद्द कर दिया जाता है और करियर अधर में लटक जाता है।
अब ज़रूरत है कि भारत सरकार और इंटरनेशनल एजेंसियां मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं, ताकि भारतीय छात्रों को उनका हक़ और सम्मान मिल सके।
अगर आप या आपके जानने वाले इस तरह की दिक्कत से गुज़र रहे हैं, तो अपनी यूनिवर्सिटी और AILA जैसी संस्थाओं से संपर्क ज़रूर करें। जानकारी और जागरूकता ही इस तरह के मामलों में आपकी सबसे बड़ी ताक़त है।
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